खिड़की में बैठकर अपनी
मैं उसे देखती रहती हूँ,
पल में गायब न हो जाए
दिल से मिन्नत करती हूँ|
मेरी सारी आशाओं में
रंग खुशी के भरता है,
सुंदर-सा वो इंद्रधनुष
मेरे मन को मोहित करता है|

जीवन में हैं दर्द बहुत से
छुपे मगर मेरे अंदर ही,
तन्हाई में आँखों से
बहते वो बनकर मोती भी|
किसको ये समझाऊँ मैं
कभी डाँट भी अच्छी लगती है,
फिक्र कोई करता है तुम्हारी
बात ये एक ही सच्ची है|
दूर हो जाते लोग क्यों हमसे
अलग-अलग सी वजहों से,
माँ देखती स्वर्ग से मगर
अंतर क्या ज़िंदा रिश्तों से|
जीवन मेरा, संघर्ष मेरे
हर दिन खुद से कहती हूँ,
साथ चल रहे लोग जो मेरे
उन्हीं में उलझी रहती हूँ|
शायद इसी का नाम है जीना
बढ़ते रहना अभिलाषा में,
कोई इंद्रधनुष रंग भरे मेरी
जीवन की परिभाषा में|
This post is a part of Blogchatter Half Marathon
© This site A Vibrant Palette is the property of Varsha Bagadia. Unauthorized use and/or duplication of this material without express and written permission from this site’s author and/or owner is strictly prohibited. Excerpts and links may be used, provided that full and clear credit is given to Varsha Bagadia and A Vibrant Palette with appropriate and specific direction to the original content.